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सूचना आयुक्त का फैसला

सूचना आयुक्त का फैसला

लखनऊ । सूचना अधिकार अधिनियम-2005 के तहत रामपुर निवासी रिफकात अली ने जनसूचना अधिकारी, जिलाधिकारी, रामपुर को आवेदन-पत्र देकर कुछ बिन्दुओं की जानकारी चाही थी कि प्रार्थी द्वारा दिनांक 28.02.2015 तथा 04.01.2016 को दिये गये प्रार्थना-पत्र पर जांच किस अधिकारी द्वारा की जा रही है, ग्राम पंचाायत टाह कला के पूर्व व वर्तमान ग्राम प्रधान द्वारा सरकारी आवासों का पैसा हड़पने व धांधली के सम्बन्ध में उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का अनुरोध किया था, मगर उक्त के सम्बन्ध में सही जानकारी नहीं मिल पायी है, जिसकी शिकायत समक्ष अधिकारियों तक की गयी, परन्तु विभाग द्वारा इस सम्बन्ध में कोई जानकारी नहीं दी गयी, अधिनियम के तहत सूचना न मिलने पर रिफकात अली ने राज्य सूचना आयोग में अपील दाखिल कर प्रकरण की जानकारी चाही है।
राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने जनसूचना अधिकारी, जिलाधिकारी, रामपुर को सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 20 (1) के तहत नोटिस जारी कर आदेशित किया कि रिफकात अली के प्रार्थना-पत्र में उठाये गये समस्त बिन्दुओं की सभी सूचनाएं अगले 30 दिन के अन्दर अनिवार्य रूप से रिफकात अली को उपलब्ध कराते हुए, आयोग को अवगत कराये, अन्यथा जनसूचना अधिकारी स्पष्टीकरण देंगे कि रिफकात अली को सूचना क्यों नहीं दी गयी है, क्यों न उनके विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जाये। फैसले के दिन जिलाधिकारी, रामपुर की ओर से भगवत सरन एवं मौ0 मोहसिन सुनवाई के दौरान उपस्थित हुए, उनके द्वारा बताया गया है कि उक्त शिकायत की जांच हेतु समिति का गठन किया गया है, पायी गयी गम्भीर अनियमितताओं की जिला बचत अधिकारी एवं विकलांग कल्याण अधिकारी द्वारा जांच की गयी, उनकी आख्या के अनुसार ग्राम पंचायत टाहकला की बी0पी0एल सूची में कुल 117 परिवारों के नाम अंकित है, 55 स्पिलिट परिवारों एवं 14 मुखिया परिवारों को लाभान्वित किये जाने हेतु ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा प्रस्ताव तैयार कर खण्ड विकास अधिकारी स्वार को उपलब्ध कराया गया। डी0आर0डी0ए0 से स्वीकृति के उपरान्त ब्लाॅक आंकिक के स्तर से एफ0टी0ओ0 जनरेट कर धनराशि जारी कर दी गयी, किन्तु 55 स्पिलिट परिवारों का पटल सहायक द्वारा गहन परीक्षण करने पर यह तथ्य प्रकाश में आया कि उक्त स्पिलिट परिवारों के मुखिया के नाम तो बी0पी0एल0 सूची में अंकित है, किन्तु स्पिलिट किये गये परिवार का नाम फैमिली आईडी0 में नहीं पाया गया। चूँकि इन्दिरा आवास योजनान्तर्गत स्पिलिट किये गये परिवार का नाम होना आवयक है। इस सम्बन्ध में पटल सहायक के द्वारा खण्ड विकास अधिकारी को अवगत कराया गया, तत्पश्चात खण्ड विकास अधिकारी ने अपने कार्यालय के पत्र द्वारा उक्त लाभार्थियों के खाते में धनराशि आहरित करने पर रोक लगाते हुए, बैंक को अपने कार्यालय के पत्र द्वारा स्पिलिट परिवारों के नाम फैमिली आईडी में न पाये जाने के कारण कुल 43 लाभार्थियों की धनराशि रू0 35,000 प्रति लाभार्थी की दर से लाभार्थियों से वापस प्राप्त कर अंकन धनराशि कुल रू0 15,05,000 (रू0 पन्द्रह लाख, पाॅच हजार) उक्त धनराशि आयुक्त ग्राम्य विकास उ0प्र0, लखनऊ के पक्ष में जमा करा दी गयी है
रिफकात अली और जिलाधिकारी रामपुर द्वारा भेजे गये दोनों कर्मचारियों की बहस सुनी गयी। रिफकात अली ने आयोग से लिखित अनुरोध किया है सम्बन्धित प्रकरण में दोषियों के खिलाफ की गयी, कार्यवाही से मुझे अभी तक अवगत नहीं कराया गया है, इस प्रकरण में जांच कर ली जाये, जिससे मुझे पूर्णरूप से सूचना प्राप्त हो सकें। चूंकि मामला जनहित से जुड़ा हुआ है। इसलिए आयोग यह समझता है कि इस पूरे प्रकरण में जांच कराया जाना न्यायहित में है। इसलिए राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए, सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 18 (2) के तहत प्रकरण में कार्यवाही आरम्भ कर दी है। इसलिए कमिश्नर मुरादाबाद, मण्डल को आदेशित किया गया है कि रिफकात अली और जिलाधिकारी रामपुर दोनों केे बयान कलमबन्द करते हुए, सम्बन्धित सभी अभिलेख (आख्या) अगले 30 के अन्दर आयोग के समक्ष पेश करें, जिससे प्रकरण मे अन्तिम निर्णय लिया जा सके।

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